मनोहर जी अपने रिश्तेदारी में कहीं भी जाते तो कुछ न कुछ कमी निकालकर लड़ने लगते, उनकी ससुराल वाले उनसे सबसे ज्यादा परेशान थे, चूंकि उनका परिवार इतना बड़ा था कि साल में तीन चार जगह तो जाना ही पड़ता, और वह जहां भी जाते हर किसी की आलोचना करने लगते, सभी बहुत परेशान थे,लेकिन मजबूरी ऐसी कि बुलाना भी पड़ता।
इस बार उन्हें विशेष निमंत्रण आया और इस दफा निमंत्रण था उनके भतीजे के जन्मदिवस का, चूंकि यहां तो वह फूफाजी थे तो उनके कहने ही क्या थे।
परिवार बालों ने उनके इंतजाम का विशेष प्लान बनाया, इस बार उनकी खुशामद के लिए एक इवेंट मैनेजर को हायर किया गया,और उसे हिदायत दी गई कि “भले ही कार्यक्रम में कुछ कमी रह जाए लेकिन बच्चे के फूफाजी की सेवा में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए”
आखिर यही हुआ मनोहर जी को फाइव स्टार सुविधा दी गई, यदि वह डिमांड करते कि चाय पीना है तो इवेंट मैनेजर 20 प्रकार की चाय की लिस्ट थमा कर पूछते “कौनसी चाय?” यदि वह बैठे बैठे पैर पसारने लगते तो सामने कई लोग सोफा लेकर खड़े मिलते ताकि सोफे पर पैर रख सकें
आखिर पूरा प्रोग्राम संपन्न हो गया और फूफाजी को कोई बुराई करने का मौका नहीं मिला
जाते समय विदा में उन्हें एक गाड़ी भी दी गई और जाते जाते उनसे पूछा गया “कोई कमी तो नहीं रह गई सम्मान में”
उन्होंने जवाब दिया
“और तो सब अच्छा था लेकिन इतनी खातिरदारी भी ठीक नहीं है”
यही हाल आजकल के कुछ बुद्धिजीवियों का है,अलग और बुद्धिमान दिखने के चक्कर में हर चीज से दुखी रहते हैं,
मनीष भार्गव
